Monday, February 8, 2010

बेज़ुबाँ वक्त

ख्यालो दिमाग से मिटाना नामुमकिन, मौला तू मुझे पतथर कर दे,
रखूँगा एहसान तेरा उम्र भर, मुझे तू बेज़ुबाँ वक्त कर दे !!.........मौला तू मुझे पतथर कर दे |

मेरे तसब्बुर* में बसी तस्वीर , हक़ीक़त ना हो जाए कहीं,
सहरा* को मिला चाहे समंदर से, तू मुझे राख कर दे !!.........मौला तू मुझे पतथर कर दे |

काफिर* सनम से ना मांगा कुछ भी, हिज़्र-ए-नवाज़ीशें* वॅक्स दी हमें,
सलामती दे तू मेरे हमनशीं* को,, मुझे चाहे अश्क़ कर दे !!.........मौला तू मुझे पतथर कर दे |

बेआरज़ू होके "बेमिसाल" शौक-ए-गम की तमन्ना करते फिरते हैं,
उम्र भर उन्हीं के शौक कबूलना, आज़ मेरी फरियाद पाक* कर दे !!.........मौला तू मुझे पतथर कर दे |

वस्ल* की शब* ना रही , जाने कहाँ वो मिलन की खुशनुमा सहर
चाहने वालों को तू ज़िंदगी दे, हस्त-ए-प्रेम* खाक कर दे !!
रखूँगा एहसान तेरा उम्र भर , मुझे तू बेज़ुबाँ वक्त कर दे !.........मौला तू मुझे पतथर कर दे |
*Translated words :
तसब्बुर- (कल्पना)Imagination
हिज़्र-ए-नवाज़ीशें- (जुदाई के तोफे) Gifts of separation
सहरा- (रेगिस्तान) Desert
हस्त- (ज़िंदगी) Life
हमनशीं - (सनम) Beloved one
पाक - (पवित्र) Holy
वस्ल - (मिलन) Get together
शब- (शाम) evening
हस्त-ए-प्रेम- prem ki zindagi
काफिर- without heart

Wednesday, February 3, 2010

Husn-e-taareef !!

Please ignore Radeef and Chand of the following poem because there is no dicipline of this poem. Sorry for this ! Will take care of this in my next composition.....
मस्त निगाहें आपकी, मदहोशियों पैमाना,
बात करें तो जैसे ग्ज़लों का फसाना |
खूब कहा है किसी ने,
देखा जिसने माह जमाल आपका ये हुस्न,
कैसे ना हो वो मुस्ताकबिल आपका दीवाना ?
मस्त निगाहें आपकी ; मदहोशी का पैमाना !!

(1.मदहोशियों-- Madness or a situation in which you don't remebember where you are , what you are
2. माह जमाल --Moon faced girl
3.मुस्ताकबिल--Receipient of something e.g when we recieve guests then we are Mustkabils
4.पैमाना-- Glass . Glass of wine(madness))

घड़ी
-दो-घड़ी देखा करें हमारी रफ भी,
इन आईनों में रखा क्या है ?
क्यों संभालते फिरते हैं ज़ुल्फ़ें अपनी ?
आने दीजिए तूफानों को,
मालूम तो पड़े,
इन खामोशियों का गिला क्या है ?

खुले
आम इस कद्र निकला ना करें,
मनचले देखकर हुस्न वालों को, शोर शराबा मचाते हैं |
अपनी नहीं फिक्र तो कम-से-कम, तनी तो सोच करें,
गुज़रेगी क्या उन राहगारों पे, जो यहाँ आते जाते हैं !!!
कोई देख ना ले खुली ज़ुल्फ़ें पकी,
यहाँ लोग तूफानों से घबराते हैं !
देखते हुस्न वालों को शोर शराबा मचाते हैं !!!!

देखे
से आपके जो हलचल मचे,
बेआरज़ू होके अलहा-अलहा कहें |
मत कार ज़ुल्म इतना ज़ालिम,
के ऊपर वाला देखे अदायें तुम्हारी,
खुद को हकीर--मूर्त कहे !!
बेबस होके वो भी अलहा-अलहा कहे,
वो भी अलहा अलहा कहे !!

(1.बेआरज़ू -- without any specific demand. In poem's context take it as: People are shouting अलहा-अलहा .Generally they cry in order to ask sth from Him. But they are not having any demand once they see her .HOpe you understand
2.हकीर--मूर्त-- a statue without any worth )

गुज़ारिशें
करते रहे,
दुआयें मांगते रहे,
मन्नतें भी मांगी बहुत,
मगर खुदा को कहाँ मंज़ूर थी खामोशियाँ ?
भेजा उनको महखाने में,
किलकारियाँ मारी लोगों ने बहुत |
'प्रेम' ब्यान क्या करे अब,
हुस्न--तारीफ आपकी?
हुस्न--तारीफ आपकी , बताने को,
अभी भी महखाने में शराबी हैं बहुत !!
हमने तो मन्नतें मांगी थी,
फिर भी किलकारियाँ मारी लोगों बहुत,
किलकारियाँ मारी लोगों ने बहुत !!

(1.किलकारियाँ -- To shout loudly like a mad
2.महखाने-- Bar.)

Thursday, January 21, 2010

परदा उठा बैठे!!

नूर आ गया शाम में,
चाँद लगा शर्माने,
तारों टिमटिमा कर करो एहतराम,
वो लगें हैं परदा उठाने!!

शराबियों ने भर-भर के जाम भर लिए,
महखाने भी लगे गज़लें गाने;
वाइज़ों मन्न्तें माँगो खुदा से हमारे लिए,
के वो परदा लगे हैं उठाने!!!


कोई संभाले हूमें आज़,
तूफान लगे हैं आने;
सुना था के हलचलें होती हैं,
तबाही होती है......
लहरें उठती हैं समंदर में,
सनसनी आवाज़ें होती हैं!!
आज़ होश ही किसे है बस्ती में?
सुना है कि अमावस शाम को आते है वो,
बस्ती में उनकी इनायतें होती है !!!


आए क्या वो पल दो पल शहर में,
हर जगह उजाले हो गये!
दुनिया वाले देखते रहे उन्हें,
पलकें झपक झपक क्रर्,,,,
उनके जाते ही मालूम पड़ा,
हम तो पलकें झपकना ही भूल गये!!


उनके
इधर रहते रहते ,
कोई संभाल ले हमें ....
जाते ही उनके, महखाने से,
ये मदभरा प्याला टूट जाएगा ,!!
"सुकून--जाम" भरने दो आज,
फिर महखाने में ऐसा सकी , खुदा जाने कब आएगा ??



महफिल में जो वो आए आज़,
होश ही खो बैठे,,
"दीदार--ज़ुल्मत" होते ही ,
"होश वालों" से उनका पता पूछ बैठे !!
दोस्तों ने संभाला भी कुछ कद्र तक,
अफसोस !!
अफसोस, के रकीब भी मौजूद थे वहीं,
जो उनका परिचय दे बैठे !!
बची हुई जान भी निकल गई उस वक्त,
जब भारी महफिल में वो परदा उठा बैठे !!
भारी महफिल में वो परदा उठा बैठे !!

Thursday, June 25, 2009

Yadein Bani Yaadgaar........


खुदा से मांगते हैं तुम्हें हरदम,
काश के आज मुद्दत हो जाए।
जिंदगी का पल- पल बीता है कैसे,
तमाम यादों के बाद , इक्क यादगार हो जाए..........!!


दुआ मांगते हैं दुनिया वाले,
अपनों के लिए.....
हमनें मांगी मुद्दतें जिंदगीभर,
बेगानों के लिए;
कबूल कर लें तमाम गुनाह अपने,
जो तू सजा देने जाए।
तमाम यादों के बाद, इक्क यादगार हो जाए......


मुनासिब ये भी है ,
के जिंदगी शाम हो जाए;
शमा जलती है अक्सर शाम के बाद,
तू चाहे तो ये शाम ,
इक्क जाम हो जाए।
तमाम यादों के बाद, इक्क यादगार हो जाए........


सजाये हैं कितने की खाव मैंने ,
पलकें हैं बेताब,
हकीकत में न सही ,
ज़हन में जो तू आए।
देंगी दुआएं ये पलकें हज़ार,
बंद आंखों में भी जो तू सामने आए।
तमाम यादों के बाद, इक्क यादगार हो जाए.......
यादगार हो जाए.............!!!

Saturday, May 2, 2009

Inteha - A tribute to Jagjit Singh !!




चाहते तो बेपनाह हैं,
कहने से डरते हैं।
गुपचुप बात भी करते हैं,
मगर इकरार करने से डरते हैं।
डरते हैं शराफत से उनकी,
नजाकत से उनकी डरते हैं,
इज़हार तो करें हम मगर,
उनकी जुदाई से डरते हैं........ !!!

समां जो ये बंधा था एक दिन,
अपना न बना सके उन्हें,
मोहोबत भी की थी अथह हमनें,
मगर बता न सके कुछ उन्हें.........
बिछड़ने मिलने का खौफ किसे ??
उनकी बेवाफी से डरते हैं ,
मोहोबत तो करें हम इनतेहा ,
मगर उनकी जुदाई से डरते हैं।

कुछ तो बात रही होगी,
यों ही बेताबी नहीं छा जाती।
रुतवा जवानी का ढला नहीं अभी ,
फ़िर भी हालात--अंजाम से डरते हैं।
इज़हार तो करें हम,
मगर उनकी जुदाई से डरते हैं।

मिलने-मिलाने की रस्मों से नहीं,
उनके सजने संवरने की फिदरत,
खुदगर्ज़ अदाओं से डरते हैं।
मोहोबत तो करें इनतेहा हम,
मगर उनकी जुदाई से डरते हैं..... !!!

देहलीज़ पर खड़े रह गए,
मासूमियत से उनकी हम डरते हैं,
जिंदगी और मौत तो आने जाने हैं,
खौफ क्या होता है,
हम तो उनकी मदभरी आंखों से डरते हैं.........
मोहोबत तो करें इनतेहा हम मगर
उनकी जुदाई से डरते हैं........
उनकी जुदाई से ...................... !!!

Thursday, April 16, 2009

Sandesa unke naam

संदेसा उनके नाम !!

गुनाहगार कहें लोगों से , हमें, वो अगर
कोई गम नहीं।
बेदर्द दिल को खंजर से मारें, खरोंचें वो अगर
कोई गम नहीं।
मोहोब्बत का नाम बेईज्ज़त न करें,
हमें चाहे सूली पर चढा दें वो अगर,
कोई गम नहीं................ !!


इकरार न किया करें वो अगर,
शरमा के नज़रें न झुकाया करें वो अगर,
बेचैन निगाहों में, बहें ना अश्क,
अश्कों में धुली आंखों में आँखें डाल,
दीदार तो करें वो अगर.......... !!


खामोशी बनी मेहरबां,
सूनापन बना मोहताज़,
जज्बात को काबू में रखें तो हम मगर,
वो यादों में मासूमियत दिखाया न करें,,
बेकरारी खत्म करें अब हम,
तरसती निगाहों पर तरस खाएं वो अगर.......... !!!


यादों की दस्तक से हो गया परेशान,
चंद नई यादें बनाने आयें वो अगर,
कहते हैं लोग , लैला और मजनू, नई दास्ताँ लिखें, जो वो गुनगुनाएं तो अगर .............. !!


मर ही गए होते तेरे चाहने वाले,
मर ही गए होते तेरे चाहने वाले...... जो पल्लू सरकता सरकता , कंधे से नीचे , गिरता जो अगर,
फनकार बन गए होते, जहाँ--इश्क में, मिलने का मौका दिया होता जो अगर
अंधेरों मैं भटकने के हम न होते कायल,
बेखुदी वो इक बार समझे होते वो अगर............ !!


Thursday, April 9, 2009

Broken Hearts !


बेवफाई मिली है


महफिलों में रहते थे कभी ,
आज जुदाई मिली है....
मोहोबत करके एक बेवफा से,
बेवफाई मिली है |


गम इस जुदाई का नहीं,
न उनकी रुसवाई का गम है |
काश मिले होते उन्हें कभी,
के मुझे तन्हाई मिली है|
करके मोहोबत इक बेवफा से,
बेवफाई मिली है |



रातों को जवा होते देखता हूँ,
(गौर फरमायें)
रातों को जवा होते देखता हूँ,
के
वो चाँद सी दिखती है !!!!
ज़माना वो भी था,
जब हाथों में हाथ होते थे,
के अब तो मोहोबत के पनघट पे ,
तन्हाई मिलती है |


वकत की मार है,
और कुछ नहीं |
पहले तस्वीर में उनकी ,,,,,,शराब नज़र आती थी......
पहले तस्वीर में उनकी ,शराब नज़र आती थी
अब
शराब में, तस्वीर उनकी नज़र आती है
आज
जाम भर साकी,
के
इन प्यालों से उनकी याद आती है |


नज़रें बिखर जाती हैं उनकी कहीं,
जब हम सामने नज़र आते हैं,
और एक हम हैं !!!
आँखें ही नी झपकटी, के जब वो याद आते हैं !!!

इंतज़ार नहीं करता मैं अब,
ये तो मेरी तकदीर बनी है ,
लम्हा लम्हा कैसे गुजरता है ??
शराब से नहीं,
साकी से नहीं,
महखाने से पूछो,
के जहाँ उनकी तस्वीर बनी है
करके मोहोबत इक बेवफा से ,
तन्हाई मिली है
तन्हाई मिली है..........!!